‘सूर्योदय की प्रतीक्षा में’ – कुँवर नारायण

वे सूर्योदय की प्रतीक्षा में
पश्चिम की ओर
मुॅंह करके खड़े थे

दूसरे दिन जब सूर्योदय हुआ
तब भी वे पश्चिम की ओर
मुॅंह करके खड़े थे

जबकि सही दिशा-संकेत के लिए
ज़रूरी होता है देखना
अपने चारों तरफ़

सूरज न तो निकलता है
न डूबता है
दुनिया घूमती है अपने और उसके चारों तरफ़।

‘हमारे साम्राज्य में सूर्यास्त नहीं होता’ –
कभी एक साम्राज्य ने कहा था गर्व से
साम्राज्य डूब गया,
सूर्योदय होता रहा पूर्ववत…

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