स्वामी विवेकानन्द की कुछ उत्कृष्ट पंक्तियाँ

“खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।”

 

“तुम फुटबाल के जरिए स्वर्ग के ज्यादा निकट होगे बजाये गीता का अध्ययन करने के।”

 

“दिल और दिमाग के टकराव में दिल की सुनो।”

 

“किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आये – आप आश्वस्त हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं।”

 

“स्वतंत्र होने का साहस करो। जहाँ तक तुम्हारे विचार जाते हैं, वहाँ तक जाने का साहस करो और उन्हें अपने जीवन में उतारने का साहस करो।”

 

“प्रेम विस्तार है, स्वार्थ संकुचन है।”

 

“जो आग हमें गर्मी देती है, हमें नष्ट भी कर सकती है, यह आग का दोष नहीं है।”

 

“आकांक्षा, अज्ञानता, और असमानता – यह बंधन की त्रिमूर्तियां हैं!”

 

“भला हम भगवान को खोजने कहाँ जा सकते हैं अगर उसे अपने हृदय और हर एक जीवित प्राणी में नहीं देख सकते।”

 

“धन्य हैं वो लोग जिनके शरीर दूसरों की सेवा करने में नष्ट हो जाते हैं।”