‘ताकत और रोमांच’ – खलील जिब्रान

(अनुवाद: बलराम अग्रवाल)

अगर कविता लिखने की ताकत और अनलिखी कविता के रोमांच के बीच किसी एक को चुनने की छूट दी जाय तो नि:संदेह मैं रोमांच को ही चुनूँगा। यही बेहतर है।

लेकिन आप और मेरे सभी जानकार इस बात से सहमत होंगे कि मैं हमेशा गलत ही चुनता आया हूँ।

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