लाजवन्ती

'लाजवन्ती' - राजिन्दर सिंह बेदी (ए सखि ये लाजवंती के पौधे हैं, हाथ लगाते ही कुम्हला जातें हैं.) बँटवारा हुआ…

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खोल दो

'खोल दो' - सआदत हसन मंटो अमृतसर से स्पेशल ट्रेन दोपहर दो बजे चली और आठ घंटों के बाद मुगलपुरा…

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फ़ोटोग्राफ़र

'फ़ोटोग्राफ़र' - कुर्रतुल एन हैदर मौसमे-बहार के फलों से घिरा बेहद नज़रफ़रेब गेस्टहाउस हरे-भरे टीले की चोटी पर दूर से…

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बू

'बू' - सआदत हसन मंटो बरसात के यही दिन थे। खिड़की के बाहर पीपल के पत्ते इसी तरह नहा रहे…

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ठण्डा गोश्त

'ठण्डा गोश्त' - सआदत हसन मंटो ईशरसिंह ज्यों ही होटल के कमरे में दाखिल हुआ, कुलवन्त कौर पलंग पर से…

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लिहाफ

'लिहाफ' - इस्मत चुग़ताई जब मैं जाड़ों में लिहाफ ओढ़ती हूँ तो पास की दीवार पर उसकी परछाई हाथी की…

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टोबा टेक सिंह

'टोबा टेक सिंह' - सआदत हसन मंटो बंटवारे के दो-तीन साल बाद पकिस्तान और हिंदुस्तान की सरकारों को ख्याल आया…

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