कविताएँ | Poetry

नज़्म: ‘आख़िरी दुआ’ – शहरयार

‘आख़िरी दुआ’ – शहरयार आख़िरी दुआ माँगने को हूँ आसमान पर, रात के सिवा, कुछ नहीं रहा कौन मुट्ठियाँ, रेत से भरे पानियों का रुख, शहर की तरफ़, अब नहीं रहा। कितने मुतमइन लोग आज Read more…

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नज़्म: ‘आख़री सच’ – निदा फाज़ली

‘आख़री सच’ – निदा फाज़ली वही है ज़िन्दा गरजते बादल सुलगते सूरज छलकती नदियों के साथ है जो ख़ुद अपने पैरों की धूप है जो ख़ुद अपनी पलकों की रात है जो बुज़ुर्ग सच्चाइयों की Read more…

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‘खटमलों की फ़रियाद’ – ‘तालिब’ ख़ुंदमीरी

‘खटमलों की फ़रियाद’ – सैयद महमूद ख़ुंदमीरी ‘तालिब’ एक दिन एक जोंक से कुछ खटमलों ने ये कहा दीजिए ख़ाला हमें भी कोई ऐसा मशवरा अब बजाए खून कोई और ही शै पी सकें आदमी से Read more…

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