पुस्तक समीक्षा | Book Reviews

कॉरपोरेट कबूतर – कहानियों की मीठी गुटर-गूँ

अय्यारों से चलकर यथार्थवाद और फिर मनोविश्लेषणों तक आने वाली हिन्दी कहानी भी कभी केवल ‘कहानी’ ही रही होगी। जैसे हमारे बचपन में हमें सुनाए जाने वाली कहानियों की किस्में नहीं हुआ करती थीं, केवल Read more…

By Puneet Kusum, ago
पुस्तक समीक्षा | Book Reviews

विजय तेंडुलकर का मराठी नाटक ‘गिद्ध’ (गिधाड़े)

‘गिद्ध’ प्रसिद्ध मराठी नाटककार एवं लेखक विजय तेंडुलकर के एक मराठी नाटक ‘गिधाड़े’ का हिन्दी अनुवाद है। अनुवादक हैं वसंतदेव देसाई। विजय तेंडुलकर ने 27 नाटक और 25 एकांकी लिखे जिनमें से ‘शांतता! कोर्ट चालू Read more…

By Posham Pa, ago
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