पुस्तक समीक्षा | Book Reviews

‘आधे-अधूरे’: अपूर्ण महत्त्वाकांक्षाओं की कलह

मोहन राकेश का नाटक ‘आधे-अधूरे’ एक मध्यमवर्गीय परिवार की आंतरिक कलह और उलझते रिश्तों के साथ-साथ समाज में स्त्री-पुरुष के बीच बदलते परिवेश तथा एक-दूसरे से दोनों की अपेक्षाओं को चित्रित करता है। महेन्द्रनाथ बहुत Read more…

By Puneet Kusum, ago

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