व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘जिसके हम मामा हैं’ – शरद जोशी

‘जिसके हम मामा हैं’ – शरद जोशी एक सज्जन बनारस पहुँचे। स्टेशन पर उतरे ही थे कि एक लड़का दौड़ता आया। ‘मामाजी! मामाजी!’ – लड़के ने लपक कर चरण छूए। वे पहचाने नहीं। बोले – Read more…

By Posham Pa, ago

Copyright © 2018 पोषम पा — All rights reserved.




Subscribe to Blog via Email

Enter your email address to subscribe to this blog and receive notifications of new posts by email.


error: