माँ

'माँ' - प्रेमचंद आज बन्दी छूटकर घर आ रहा है। करुणा ने एक दिन पहले ही घर लीप-पोत रखा था।…

Continue Reading

सैक्स फंड

'सैक्स फंड' - सुषमा गुप्ता "आंटी जी चंदा इकठ्ठा कर रहें हैं। आप भी कुछ अपनी इच्छा से दे दीजिए।"…

Continue Reading

सहपाठी

'सहपाठी' - सत्यजित राय अभी सुबह के सवा नौ बजे हैं। मोहित सरकार ने गले में टाई का फंदा डाला ही…

Continue Reading

अलग्योझा

'अलग्योझा' - प्रेमचंद भोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने बाद दूसरी सगाई की तो उसके लड़के रग्घू के…

Continue Reading

मजदूर का एक दिन

'मजदूर का एक दिन' - अनुराग शर्मा बाईं आँख रह-रह कर फड़क रही थी। कई बार मला मगर कोई फायदा…

Continue Reading
कवि का हृदय
Portrait of Indian author and poet Rabindranath Tagore, circa 1935. (Photo by Fox Photos/Hulton Archive/Getty Images)

कवि का हृदय

'कवि का हृदय' - रवीन्द्रनाथ टैगोर चांदनी रात में भगवान विष्णु बैठे मन-ही-मन गुनगुना रहे थे- ''मैं विचार किया करता…

Continue Reading

पुरस्कार

'पुरस्कार' - जयशंकर प्रसाद आर्द्रा नक्षत्र; आकाश में काले-काले बादलों की घुमड़, जिसमें देव-दुन्दुभी का गम्भीर घोष। प्राची के एक…

Continue Reading

धुआँ

'धुआँ' - गुलज़ार बात सुलगी तो बहुत धीरे से थी, लेकिन देखते ही देखते पूरे कस्बे में 'धुआँ' भर गया।…

Continue Reading
Close Menu
error: