हँसी-खुशी

निबन्ध: 'हँसी-खुशी' - बालमुकुंद गुप्त हँसी भीतर आनंद का बाहरी चिह्न है। जीवन की सबसे प्यारी और उत्तम से उत्तम…

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भय

'भय' - रामचंद्र शुक्ल किसी आती हुई आपदा की भावना या दुःख के कारण के साक्षात्‍कार से जो एक प्रकार…

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गेहूँ बनाम गुलाब

'गेहूँ बनाम गुलाब' - रामवृक्ष बेनीपुरी गेहूँ हम खाते हैं, गुलाब सूँघते हैं। एक से शरीर की पुष्टि होती है,…

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धोखा

'धोखा' - प्रतापनारायण मिश्र इन दो अक्षरों में भी न जाने कितनी शक्ति है कि इनकी लपेट से बचना यदि…

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