Tag: Arun Kumar Shrivastav

Letters

हम-तुम

'तुम्हारी...' लिख के जहाँ तुम अपना ख़त समाप्त करती हो, मैं ठीक वहीं से बाँचना शुरू करता हूँ.. तुम्हारा खत और.. पढ़ते-पढ़ते ऊपर वैसे ही आता हूँ, जैसे.. 'समुद्र-तल' से ख़ज़ाने लेकर...
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