एक पिता

'एक पिता' - कबीन फूकन घुप्प अँधेरे में जंगल की राह रोके खड़ा था फन फैलाए एक साँप द्रुत गति…

Continue Reading

पर्वत के उस पार

असमिया कविता: 'पर्वत के उस पार' - समीर ताँती पर्वत के उस पार कहीं लो बुझी दीपशिखा इस पार हुआ…

Continue Reading
Close Menu
error: