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Balswaroop Rahi

मेरे पास नहीं है श्रद्धा

मुझ पर गर्वित अहम्-भाव का शासन नहीं चलेगा किन्तु स्वयं झुककर तुम मुझे झुका लो, जितना मन हो। ऊँचे से ऊँचे पर्वत से ऊँचा मेरा माथा पर...
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