कहानी | Story

कहानी: ‘गूंगी’ – रवींद्रनाथ टैगोर

कहानी: ‘गूंगी‘ – रवींद्रनाथ टैगोर कन्या का नाम जब सुभाषिणी रखा गया था तब कौन जानता था कि वह गूंगी होगी। इसके पहले, उसकी दो बड़ी बहनों के सुकेशिनी और सुहासिनी नाम रखे जा चुके Read more…

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कहानी: ‘अनमोल भेंट’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर

‘अनमोल भेंट’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर रायचरण बारह वर्ष की आयु से अपने मालिक का बच्‍चा खिलाने पर नौकर हुआ था। उसके पश्चात् काफी समय बीत गया। नन्हा बच्‍चा रायचरण की गोद से निकलकर स्कूल में Read more…

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कहानी: ‘काबुलीवाला’ – रवींद्रनाथ टैगोर

‘काबुलीवाला’ – रवींद्रनाथ टैगोर मेरी पाँच वर्ष की छोटी लड़की मिनी से पल भर भी बात किए बिना नहीं रहा जाता। दुनिया में आने के बाद भाषा सीखने में उसने सिर्फ एक ही वर्ष लगाया Read more…

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कहानी: ‘सहपाठी’ – सत्यजित राय

‘सहपाठी’ – सत्यजित राय अभी सुबह के सवा नौ बजे हैं। मोहित सरकार ने गले में टाई का फंदा डाला ही था कि उस की पत्नी अरुणा कमरे में आई और बोली, ‘तुम्हारा फोन।’ ‘अब अभी Read more…

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कहानी: ‘अनुपमा का प्रेम’ – शरतचंद्र चट्टोपाध्याय

‘अनुपमा का प्रेम’ – शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ग्यारह वर्ष की आयु से ही अनुपमा उपन्यास पढ़-पढ़कर मष्तिष्क को एकदम बिगाड़ बैठी थी। वह समझती थी, मनुष्य के हृदय में जितना प्रेम, जितनी माधुरी, जितनी शोभा, जितना Read more…

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