कविता | Poetry

बिल्क़ीस ज़फ़िरुल हसन की नज़्म ‘मैं’

‘मैं’ – बिल्क़ीस ज़फ़िरुल हसन कोई गिला तुझसे शिकायत कुछ नहीं है तेरी ही तरह मैंने भी लिखे हैं ऐसे अफ़साने निहायत पाक-तीनत1, बेख़ता मासूम करैक्टर तराशे फिर उनको दर्द, नाकामी, ग़म व हसरत सज़ाएँ और Read more…

By Posham Pa, ago
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