Tag: Bourgeoisie

Fahmida Riaz

इस गली के मोड़ पर

इस गली के मोड़ पर इक अज़ीज़ दोस्त ने मेरे अश्क पोंछकर आज मुझसे ये कहा— यूँ न दिल जलाओ तुम लूट-मार का है राज जल रहा है कुल...
Old man from village

जाहिल के बाने

मैं असभ्य हूँ क्योंकि खुले नंगे पाँवों चलता हूँ मैं असभ्य हूँ क्योंकि धूल की गोदी में पलता हूँ मैं असभ्य हूँ क्योंकि चीरकर धरती धान...
Rahul Boyal

पानी की तरह इज़्ज़त

'Pani Ki Tarah Izzat', a poem by Rahul Boyal कार वाले साहब तो दुत्कार कर चले गये कि हमारी छातियों में ईर्ष्या के पत्थर गड़े हैं अब...
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