नव-लेखन | New Writing

कविता: ‘राधा-कृष्ण’ – शिवा & पुनीत कुसुम

Puneet- हे राधे, हे राधे हे राधे, हे राधे हे राधे, हे राधे कान्हा ढूँढ रहा तुझे राधे ऊपर नभ् को खोल खोल कर धरती के भीतर टटोल कर स्वर्ग, नरक और पातालों में जीव-मरण Read more…

By Shiva, ago
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