व्यंग्य | Satire

‘एक प्रस्तवित स्कूल की नियमावली’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र

‘एक प्रस्तवित स्कूल की नियमावली’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र (लगभग सवा सौ साल पहले की बात है। इस लेखक ने देखा ‘एक अद्भुत अपूर्व स्वप्न’। स्वप्न में उसने बिचारा कि देह लीला समाप्त हो जाने के Read more…

By Posham Pa, ago
पुस्तक समीक्षा | Book Reviews

‘अपनी अपनी बीमारी’ – हरिशंकर परसाई की व्यंग्य चिकित्सा

तीन-चार पेजों की बीस-इक्कीस कहानियों में अपने समाज की लगभग सारी बुराईयों को पृष्ठ-दर-पृष्ठ उघाड़ देना हरिशंकर परसाई ही कर सकते हैं। और वह भी ऐसी बीमारियाँ जिनसे ग्रस्त होना इस समाज के लिए एक Read more…

By Puneet Kusum, ago
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