Tag: Humanity

Nishant

कविता की परीक्षा

'Kavita Ki Pareeksha', a poem by Nishant Upadhyay ईश्वर की परिभाषा क्या है? हर धर्म के अपने ईश्वर होते हैं। धर्म की परिभाषा क्या है? धर्म ईश्वर से...

सही क्रम

भूल जाओ किस जाति, किस वर्ण को कहाँ से पैदा किया ब्रह्मा ने और देखो अपनी गंदली आँखें धोकर क्या संयोजन है प्रकृति का? पैर! पूरे बदन में सबसे बलशाली हैं जिराफ़ के...
Maithili Sharan Gupt

मनुष्यता

विचार लो कि मर्त्य हो, न मृत्यु से डरो कभी, मरो परन्तु यों मरो कि याद जो करें सभी। हुई न यों सु-मृत्यु तो वृथा मरे, वृथा...

भूख

कोई बड़ी बात नहीं, महसूस करना किसी भूखे इंसान का दर्द जब भूख से जल रही हों अंतड़ियाँ खुद की बल्कि भरपेट भोजन मिलने पर भी अगर महसूस करते हो किसी...
Bhuvaneshwar

सूर्यपूजा

"थोड़े-से क्लर्क, दुकानदार, दलाल, अ़फसर - और हर एक शहर में बिलकुल ऐसे ही क्लर्क, दुकानदार, दलाल और अफसर हैं, बिलकुल ऐसे ही! यह इतनी डुप्लीकेट कॉपियाँ आखिर क्यों हैं! जब खुद असल ही इतना जलील है। कोई यह यकीन करेगा कि यह एक शहर है जहाँ आदमी रहते हैं - जिन्दा, पूरे-पूरे मनुष्य, जो ह्यूमेनिटी कही जाती है?"
Dharmvir Bharati

गुलकी बन्नो

कहते हैं वास्तविक जीवन गली-मोहल्लों में देखने को मिलता है, इसका एक कारण यह है कि यही हमारे आधुनिक परिवेश का इतिहास रहा है, हम वहीं से उठ कर आए हैं.. और दूसरा यह कि इन्हीं जगहों पर मानवीय संवेदना अपने मूल और नग्न रूप में देखने को मिलती है.. ऐसा ही एक जीवन दिखाती, धर्मवीर भारती की इस कहानी का एक मुख्य पात्र इसका परिवेश, इसका वातावरण भी है, जो अन्य पात्रों के साथ इस कहानी के पाठकों पर पड़ने वाले प्रभाव में मुख्य भूमिका निभाता है.. गुलकी से झगड़ते, उसे परेशान करते, उस पर हँसते गली के बच्चे कैसे कहानी के अंत में अपनी 'छोटी-छोटी पसलियों में आँसू जमा' हुआ पाते हैं, पढ़ने लायक है...
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