औरत और मर्द

'औरत और मर्द'  - खलील जिब्रान  (अनुवाद: बलराम अग्रवाल) एक बार मैंने एक औरत का चेहरा देखा। उसमें मुझे उसकी समस्त…

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घुमक्कड़

'घुमक्कड़' - खलील जिब्रान वह मुझे चौराहे पर मिला। एक व्यक्ति जिसके पास केवल एक लबादा और एक छड़ी थी,…

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ताकत और रोमांच

'ताकत और रोमांच' - खलील जिब्रान (अनुवाद: बलराम अग्रवाल) अगर कविता लिखने की ताकत और अनलिखी कविता के रोमांच के…

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चतुर कुत्ता

'चतुर कुत्ता' - खलील जिब्रान (अनुवाद: बलराम अग्रवाल) एक चतुर कुत्ता एक दिन बिल्लियों के एक झुण्ड के पास से…

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कविता

'कविता' - खलील जिब्रान अनुवाद: बलराम अग्रवाल एक कवि से मैंने एक बार कहा, "तुम्हारी मौत से पहले हम तुम्हारे…

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