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Krishna Baldev Vaid

उड़ान

और एक दिन वह सब काम-धन्धे छोड़कर घर से निकल पड़ी। कोई निश्चित प्रोग्राम नहीं था, कोई सम्बन्धी बीमार नहीं था, किसी का लड़का पास...
Krishna Baldev Vaid

मेरा दुश्मन

उसकी मुस्कराहट में माला के बाहर जाते ही फिर वही ज़हर और चैलेंज आ गया था और मुझे महसूस हुआ जैसे वह कह रहा हो - "बीवी तुम्‍हारी मुझे पसंद है, लेकिन बेटे! उसे खबरदार कर दो, मैं इतना पिलपिला नहीं जितना वह समझती है।"
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