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Anamika Anu

अनामिका अनु की कविताएँ

मैं मारी जाऊँगी मैं उस भीड़ के द्वारा मारी जाऊँगी जिससे भिन्न सोचती हूँ। भीड़-सा नहीं सोचना भीड़ के विरुद्ध होना नहीं होता है। ज़्यादातर भीड़ के भले के लिए...
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