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दुविधा (मुक्तिबोध की कविता ‘मुझे कदम कदम पर’ से प्रेरित)

कविताएँ अपने पाठकों के भीतर बहुत कुछ जगा देती हैं और उन्हें बहुत जगह भी देती हैं जिसमें कुछ न कुछ चुपचाप बैठा रहता है, जीता रहता है, बढ़ता रहता है और मौका ढूँढता रहता Read more…

By Posham Pa, ago

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