कहानी | Story

कहानी: ‘आहुति’ – प्रेमचंद

‘आहुति’ – प्रेमचंद आनन्द ने गद्देदार कुर्सी पर बैठकर सिगार जलाते हुए कहा- आज विशम्भर ने कैसी हिमाकत की! इम्तहान करीब है और आप आज वालण्टियर बन बैठे। कहीं पकड़ गये, तो इम्तहान से हाथ Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘कफ़न’ – प्रेमचंद

‘कफ़न’ – प्रेमचंद झोपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए हैं और अन्दर बेटे की जवान बीबी बुधिया प्रसव-वेदना में पछाड़ खा रही थी। रह-रहकर Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘माँ’ – प्रेमचंद

‘माँ’ – प्रेमचंद आज बन्दी छूटकर घर आ रहा है। करुणा ने एक दिन पहले ही घर लीप-पोत रखा था। इन तीन वर्षों में उसने कठिन तपस्या करके जो दस-पाँच रूपये जमा कर रखे थे, Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘अलग्योझा’ – प्रेमचंद

‘अलग्योझा’ – प्रेमचंद भोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने बाद दूसरी सगाई की तो उसके लड़के रग्घू के लिये बुरे दिन आ गये। रग्घू की उम्र उस समय केवल दस वर्ष की थी। Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘सौत’ – प्रेमचंद

‘सौत’ – प्रेमचंद 1 जब रजिया के दो-तीन बच्चे होकर मर गये और उम्र ढल चली, तो रामू का प्रेम उससे कुछ कम होने लगा और दूसरे ब्याह की धुन सवार हुई। आये दिन रजिया Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘ठाकुर का कुआँ’ – प्रेमचंद

‘ठाकुर का कुआँ’ – प्रेमचंद जोखू ने लोटा मुँह से लगाया तो पानी में सख्त बदबू आयी। गंगी से बोला- “यह कैसा पानी है? मारे बास के पिया नहीं जाता। गला सूखा जा रहा है Read more…

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उद्धरण | Quotes

कुछ पंक्तियाँ – ‘ग़बन’ (प्रेमचंद)

“उत्कंठा की चरम सीमा ही निराशा है।” “रूपये के मामले में पुरूष महिलाओं के सामने कुछ नहीं कह सकता। क्या वह कह सकता है, इस वक्त मेरे पास रूपये नहीं हैं। वह मर जाएगा, पर Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘ईदगाह’ – प्रेमचंद

‘ईदगाह’ – प्रेमचंद 1 रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘पूस की रात’ – प्रेमचंद

‘पूस की रात’ – प्रेमचंद 1 हल्कू ने आकर स्त्री से कहा- सहना आया है, लाओ, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे। मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिरकर Read more…

By Posham Pa, ago
ब्लॉग | Blog

हिन्दी दिवस का उपहार – ‘प्रेमचंद – कलम का सिपाही’

किसी हिन्दी पाठक के पढ़ने की शुरुआत कहीं से भी हुई हो, जब तक अन्य उम्दा लेखकों से साक्षात्कार नहीं हो जाता या फिर खुद के फेवरेट्स नहीं बन जाते, किसी भी नए पाठक को Read more…

By Puneet Kusum, ago

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