नव-लेखन | New Writing

तसनीफ़ हैदर – मोहब्बत की नज़्में (पहला दौर) – 4

(1) एक शाम सिर्फ़ अँधेरे से सजाई जाये हवाएं दबे पाऊँ आकर स्लाइडिंग की दराज़ों में बैठ जाएँ तुम्हारी पिंडिलयों पर मेरे पैर का अंगूठा लिख रहा हो रात का सियाह गुदाज़ लफ़्ज़ तुम्हारी दाईं Read more…

By Posham Pa, ago
नव-लेखन | New Writing

तसनीफ़ हैदर – मोहब्बत की नज़्में (पहला दौर) – 3

(1) तुम मुझसे नाराज़ न होना मैंने अपने दिल पन्नों पर हर्फ़ लिखा है ख़्वाबों वाला इस जंगल से गुज़र रहा है इक आसेब सराबों वाला नींद नगर मीनारों वाले, याद महल मेहराबों वाला सब Read more…

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तसनीफ़ हैदर – मोहब्बत की नज़्में (पहला दौर) – 2

(1) ये बर्फ़ की तरह ठंडा हाथ अपनी तासीर में बर्फ़ की सफ़ेद परत के नीचे रेंगते आतिशीं अज़दहे की तरह गर्म है इस हाथ को मेरे सीने पर रख कर देखो एक तिलिस्मी ग़ार Read more…

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तसनीफ़ हैदर – मोहब्बत की नज़्में (पहला दौर) – 1

दुनिया में जब पहली बार किसी ने मोहब्बत की होगी तो उस मोहब्बत का इज़हार शायरी में ना हुआ होगा, यह बात मन को नहीं भाती। बातों ने मिसरों का रूप न लिया होगा, लफ़्ज़ Read more…

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