Tag: Udhav Gopi

bhartendu harishchandra

ऊधो जो अनेक मन होते

ऊधो जो अनेक मन होते तो इक श्याम-सुन्दर को देते, इक लै जोग संजोते। एक सों सब गृह कारज करते, एक सों धरते ध्यान। एक सों श्याम...
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