काला सूरज

'काला सूरज' - अख़्तर राही कितने रौशन आफ़्ताबों को निगल कर काला सूरज रौशनी के शहर में दाख़िल हुआ सारी काली…

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एक थी औरत

'एक थी औरत' - मीराजी ये जी चाहता है कि तुम एक नन्ही सी लड़की हो और हम तुम्हें गोद…

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देवदास

'देवदास' - अंजुम आज़मी ज़िंदगी इश्क़ की वहशत-भरा अफ़्साना थी मेरे हाथों में वो इक ज़हर का पैमाना थी रूह…

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नया शिवाला

'नया शिवाला' - अल्लामा इक़बाल सच कह दूँ ऐ बरहमन गर तू बुरा न माने तेरे सनम-कदों के बुत हो…

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बे परों की तितली

नज़्म: 'बे परों की तितली' - सर्वत ज़हरा ये झाड़न की मिट्टी से मैं गिर रही हूँ ये पंखे की घूं-घूं…

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