कविता | Poetry

नज़्म: ‘गर्ल्स कॉलेज की लारी’ – जाँ निसार अख़्तर

“‘गर्ल्स कॉलेज की लारी’ जाँ निसार अख़्तर की पहली नज़्म है जिसने उन्हें ख्याति की सीढ़ी पर ला खड़ा किया। यह एक वर्णात्मक (Narrative) नज़्म थी और जाँ निसार अख़्तर के कथनानुसार ‘जवानी की एक Read more…

By Posham Pa, ago
कविता | Poetry

बिल्क़ीस ज़फ़िरुल हसन की नज़्म ‘मैं’

‘मैं’ – बिल्क़ीस ज़फ़िरुल हसन कोई गिला तुझसे शिकायत कुछ नहीं है तेरी ही तरह मैंने भी लिखे हैं ऐसे अफ़साने निहायत पाक-तीनत1, बेख़ता मासूम करैक्टर तराशे फिर उनको दर्द, नाकामी, ग़म व हसरत सज़ाएँ और Read more…

By Posham Pa, ago
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