Tag: Wall and Shadow

Ahmad Faraz

मैं और तू

रोज़ जब धूप पहाड़ों से उतरने लगती कोई घटता हुआ, बढ़ता हुआ, बेकल साया एक दीवार से कहता कि मिरे साथ चलो और ज़ंजीर-ए-रिफ़ाक़त से गुरेज़ाँ दीवार अपने...
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