Couple, Love

तुम्हारे साथ चलते हुए

तुम्हारे समानांतर
चलते हुए
जब थकने लगेंगे
पाँव मेरे,
वक़्त की गर्त
चेहरे पर
झुर्रियों की शक़्ल
अख़्तियार कर लेगी,
जिस्म करने लगेगा
इसरार मुझसे
अंतिम सफ़र पर चलने के लिए,
उस वक़्त भी
आखिरी आरामगाह में
लकड़ियों के बोझ तले
झांकती ऑंखें
ढूंढेंगी कोई हर्फ़ अपने लिए
तुम्हारे लिखे
अफसानों में,
और उँगलियाँ
पलट रही होंगी
कोई सफ़हा
तुम्हारी किसी किताब का!