उल्टी वा की धार!

पानी से प्यास
और छुअन से बेकली
मिलन से बेचैनी
और आलिंगन से ताप
सब बढ़ रहा है
ख़ुसरो तुमने ठीक कहा था
इस नदी की धार उल्टी है!