कवि: जॉन गुज़लॉस्की
अनुवाद: देवेश पथ सारिया

युद्ध तुम्हें मार देगा
और ठण्डा पड़ा छोड़ देगा तुम्हें
गलियों में
या खेतों में
बमों से विध्वंस हुई इमारतों की
ईंटों की तरह

पर चिन्ता न करो
फिर शान्ति आएगी
तुम्हें दफ़ना देगी वह
और बैठ जाएगी तुम्हारे ऊपर
तुम्हारी माँ की तरह रोती हुई,
दुआ माँगती हुई
तुम्हारी वापसी की

बुदबुदाएगी
जैसे कि वह करती थी तब
जब तुम लड़के थे,
नाश्ते से पहले
धारा में अपने
मुँह-हाथ धोते थे

वह रोएगी
जब तक
ईश्वर एक चमत्कार न कर दे
और तुम उठ जाओगे
सुनहरी किरणों
और चहचहाते पक्षियों के बीच

और फिर
युद्ध लौट आएगा
और तुम्हें मार देगा।

देवेश पथ सारिया
कवि-लेखक एवं अनुवादक। पुरस्कार— भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (2023) प्रकाशित पुस्तकें— कविता संग्रह: नूह की नाव : साहित्य अकादेमी, दिल्ली से; A Toast to Winter Solstice. कथेतर गद्य: छोटी आँखों की पुतलियों में (ताइवान डायरी)। अनुवाद: हक़ीक़त के बीच दरार : ली मिन-युंग की कविताएँ; यातना शिविर में साथिनें : जाॅन गुज़लाॅव्स्की की कविताएँ। अन्य भाषाओं में अनुवाद/प्रकाशन: कविताओं का अनुवाद अंग्रेज़ी, मंदारिन चायनीज़, रूसी, स्पेनिश, बांग्ला, मराठी, पंजाबी और राजस्थानी भाषा-बोलियों में हो चुका है। इन अनुवादों का प्रकाशन लिबर्टी टाइम्स, लिटरेरी ताइवान, ली पोएट्री, यूनाइटेड डेली न्यूज़, स्पिल वर्ड्स, बैटर दैन स्टारबक्स, गुलमोहर क्वार्टरली, बाँग्ला कोबिता, इराबोती, कथेसर, सेतु अंग्रेज़ी, प्रतिमान पंजाबी और भरत वाक्य मराठी पत्र-पत्रिकाओं में हुआ है। हिंदी की लगभग सभी महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का निरंतर प्रकाशन।