कविता

मन का घर, तुमसे विलग होकर

मन का घर उसके मन के घर में गूँजती रहती हैं टूटती इच्छाओं की मौन आवाज़ें उसमें हर बालिश्त दर्ज होती जाती है छूटते जा रहे सपनों से पलायन की एक लम्बी...

कहानी

नायक

'रिश्ता और अन्य कहानियाँ' से आँगन में वह बाँस की कुर्सी पर पाँव उठाए बैठा था। अगर कुर्ता-पाजामा न पहने होता तो सामने से आदिम...

स्त्री विमर्श

मन का घर उसके मन के घर में गूँजती रहती हैं टूटती इच्छाओं की मौन आवाज़ें उसमें हर बालिश्त दर्ज होती जाती है छूटते जा रहे सपनों से पलायन की एक लम्बी फ़ेहरिस्त क्षोभ के इस अतल सागर में डूब जाने से, वो बचा लेना चाहती है तैरने के लिए...
मनोरंजन के 'तीसरे' परदे के रूप में उभरे नेटफ़्लिक्स पर आयी फ़िल्म 'बुलबुल' इन दिनों ख़ूब चर्चा में है। चर्चा का मुख्य विषय है इस फ़िल्म में एक नारीवादी दृष्टिकोण का चित्रण, और दृश्यात्मक भव्यता। ये दो कारण जो...
"अरे देखो रे रिंकिया... दिन दहाड़े वो बुढ़िया खुखड़ी चुरा कर भाग रही है, पकड़ो पकड़ो उसे... खुखड़ी छीन कर वापस रख लेना।" रिंकिया की माई ने चिल्लाते हुए कहा। रिंकिया तुरन्त बिजली की गति खेत में भागी। ढ़ेला से...
तुम कहते हो मेरी सोच ग़लत है चीज़ों और मुद्दों को देखने का नज़रिया ठीक नहीं है मेरा आपत्ति है तुम्हें मेरे विरोध जताने के तरीक़े पर तुम्हारा मानना है कि इतनी ऊँची आवाज़ में बोलना हम स्त्रियों को शोभा नहीं देता धारणा है तुम्हारी कि स्त्री होने की अपनी...
अजीब-सी इत्तिला थी वो जिसे मैं ख़ुद से न जाने कब से छुपा रही थी अजब ख़बर थी कि जिसकी बाबत मैं ख़ुद से सच बोलते हुए हिचकिचा रही थी अजीब दुःख था कि जिसका एहसास जागते ही मैं अपने महरम से अपने हमदम से ऐसे नज़रें...
1 घर की ज़ंजीरें कितना ज़्यादा दिखायी पड़ती हैं जब घर से कोई लड़की भागती है क्या उस रात की याद आ रही है जो पुरानी फ़िल्मों में बार-बार आती थी जब भी कोई लड़की घर से भागती थी? बारिश से घिरे वे पत्थर के लैम्पपोस्ट महज़ आँखों की...

दलित विमर्श

ग़ज़ल

उद्धरण

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