‘Aadat’, a poem by Archana Verma

मरदों ने घर को
लौटने का पर्याय बना लिया
और लौटने को मर जाने का
घर को फिर उन्होंने देखा ही नहीं
लौटकर उम्र भर
मरने से डरने का
यही तो था एक सम्भव नतीजा!

घर भर की औरतें
जाने किसकी प्रतीक्षा में
तवा चढ़ाए, चूल्हा लहकाए
बैठी रहीं सदियों कि
आते ही
गरम रोटी उतार सकें।

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अर्चना वर्मा
जन्म : 6 अप्रैल 1946, इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) भाषा : हिंदी विधाएँ : कविता, कहानी, आलोचना मुख्य कृतियाँ कविता संग्रह : कुछ दूर तक, लौटा है विजेता कहानी संग्रह : स्थगित, राजपाट तथा अन्य कहानियाँ आलोचना : निराला के सृजन सीमांत : विहग और मीन, अस्मिता विमर्श का स्त्री-स्वर संपादन : ‘हंस’ में 1986 से लेकर 2008 तक संपादन सहयोग, ‘कथादेश’ के साथ संपादन सहयोग 2008 से, औरत : उत्तरकथा, अतीत होती सदी और स्त्री का भविष्य, देहरि भई बिदेस संपर्क जे. 901, हाई बर्ड, निहो स्कॉटिश गार्डन, अहिंसा खंड-2, इंदिरापुरम, गाजियाबाद

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