आगोश

ज़र प्रेम के बाद तुम्हारे आगोश में सिमटकर मासूमियत से सो जाना , जैसे किसी प्रेम पगी कविता की असाधारण अन्तिम पँक्ति लिखना।

– निधि नित्या