पुराने घर की भीत पर
अभी भी लटका है
बाबा की देह से उतरा,
अन्तिम कुर्ता
नया घर, कोई घर नहीं होता

आँगन में बूढ़ा पीपल
अब भी खड़ा है
जो लिखता है पुरखों का इतिहास
अभी-अभी काटा गया है नीम
नए घर के लिए
नया घर, कोई घर नहीं होता

आँगन की रेत में
अभी भी हँसते है
बच्चे के घरोंदे
नया घर, कोई घर नहीं होता

एक कुत्ता आया करता था
बाबा के पास
दो रोटी के लिए

अब बाबा नहीं है
कुत्ता नहीं है
और वो घर भी नहीं है।

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