“अच्छा चलता हूँ..”
कितनी ही बार कहता हूँ तुमसे
जाना, तुम्हें अलविदा कहकर
कितना मुश्किल होता है
हर बार “चलता हूँ” के बाद
एक नाज़ुक सा “सुनो”
और फिर कितनी ही बार जाकर लौट आता हूँ
जितना वक़्त ठहरता हूँ
उससे कहीं ज़्यादा वक़्त बीत जाता है
ये कहते कि “चलता हूँ”!!

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