अदम से कुन फकां तक का सफ़र था और हम थे
थिरकता चाक था, इक कूज़ागर था और हम थे

तुम्हीं को देखते गुज़रे थे इक सच्चाई से हम
जहाँ आशोब ही हद्दे नज़र था और हम थे

बड़ी मुश्किल से की दरयाफ़्त हमने रग़बत ए ग़म
फिर उसके बाद तो आसाँ सफ़र था और हम थे

ग़ुज़ारी उम्र हमने आबयारी में किसी की
वो अपना एक कार ए बेसमर था और हम थे

गड़ी हो नाल जिस दर पे बुलाती है वो मिट्टी
यही होना था आख़िर, फिर वो दर था, और हम थे

-ख़याल

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