आदिवासी लड़कियों के बारे में

‘Adivasi Ladkiyon Ke Baare Mein’, Hindi Kavita by Nirmala Putul

ऊपर से काली
भीतर से अपने चमकते दाँतों
की तरह शान्त धवल होती हैं वे

वे जब हँसती हैं फेनिल दूध सी
निश्छल हँसी
तब झर झराकर झरते हैं
पहाड़ की कोख में मीठे पानी के सोते

जूड़े में खोंसकर हरी-पीली पत्तियाँ
जब नाचती हैं क़तारबद्ध
माँदल की थाप पर
आ जाता तब असमय वसन्त

वे जब खेतों में
फ़सलों को रोपती-काटती हुई
गाती हैं गीत
भूल जाती हैं ज़िन्दगी के दर्द
ऐसा कहा गया है

किसने कहे हैं उनके परिचय में
इतने बड़े-बड़े झूठ?
किसने?

निश्चय ही वह हमारी जमात का
खाया-पीया आदमी होगा
सच्चाई को धुन्ध में लपेटता
एक निर्लज्ज सौदागर

ज़रूर वह शब्दों से धोखा करता हुआ
कोई कवि होगा
मस्तिष्क से अपाहिज!

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