बटमारी, प्रेम और आजीविका के रास्तों से भी गुज़रना होता है
और जैसा कि कहा गया है इसमें कोई सावधानी काम नहीं आती
अकुशलता ही देती है कुछ दूर तक साथ
जहाँ पैर काँपते हैं और चला नहीं जाता
चलना पड़ता है उन रास्तों पर भी
जो कहते हैं: हमने यह रास्ता कौशल से चुना
वे याद कर सकते हैं: उन्हें इस राह पर धकेला गया था
जीवन रीतता जाता है और भरी हुई बोतल का
ढक्कन ठीक से खोलना किसी को नहीं आता
अकसर द्रव छलकता है कमीज़ और पेंट की सन्धि पर गिरता हुआ
छोटी सी बात है लेकिन
गिलास से पानी पिए लम्बा वक़्त गुज़र जाता है
हर जगह बोतल मिलती है जिससे पानी पीना भी एक कुशलता है
जो निपुण हैं अनेक क्रियाओं में वे जानते ही हैं
कि विशेषज्ञ होना नए सिरे से नौसिखिया होना है
कुशलता की हद है कि फिर एक दिन एक फूल को
क्रेन से उठाया जाता है।

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कुमार अम्बुज
कुमार अंबुज (१३ अप्रैल १९५७), जिनका मूल नाम पुरुषोत्‍तम कुमार सक्‍सेना है और जिनका कार्यालयीन रिकॉर्ड में जन्‍म दिनांक 13 अप्रैल 1956 है, हिन्दी के कवि हैं। उनका पहला कविता संग्रह किवाड़ है जिसकी शीर्षक कविता को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार मिला। 'क्रूरता' नामक इनका दूसरा कविता संग्रह है। उसके बाद 'अनंतिम', 'अतिक्रमण' और फिर 2011 में 'अमीरी रेखा' कविता संग्रह विशेष रूप से चर्चित हुए हैं।