जल के साथ जल हूँ,
खेतों तक उसे लाता हुआ।

बीज के साथ बीज हूँ,
उसे उगाता हुआ।

हवा के साथ हवा हूँ,
फ़सल के साथ लहराता हुआ।

धूप के साथ धूप हूँ,
धान पकाता हुआ।

ठण्ड के साथ ठण्ड हूँ,
पहरे पर जाता हुआ।

दिन हूँ, रात हूँ,
सुबह दुपहर शाम हूँ,
अनथक बेचैन हूँ,
आपका और अपना चैन हूँ,
अन्न के ढेर लगाता हुआ।

नन्हे दुध-मुहों के मुँह से
बूढ़े बुज़ुर्ग-मुहों तक
मैं ही तो हूँ,
दुखी या मुस्काता हुआ।

प्रयाग शुक्ल की कविता 'उन्माद के ख़िलाफ़'

Book by Prayag Shukla:

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प्रयाग शुक्ल
प्रयाग शुक्ल (जन्म १९४०) हिन्दी के कवि, कला-समीक्षक, अनुवादक एवं कहानीकार हैं। ये साहित्य अकादेमी का अनुवाद पुरस्कार, शरद जोशी सम्मान एवं द्विजदेव सम्मान से सम्मानित हैं।

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