अरे, अब ऐसी कविता लिखो
कि जिसमें छन्द घूमकर आए
घुमड़ता जाए देह में दर्द
कहीं पर एक बार ठहराए

कि जिसमें एक प्रतिज्ञा करूँ
वही दो बार शब्द बन जाए
बताऊँ बार-बार वह अर्थ
न भाषा अपने को दोहराए

अरे, अब ऐसी कविता लिखो
कि कोई मूड़ नहीं मटकाए
न कोई पुलक-पुलक रह जाए
न कोई बेमतलब अकुलाए

छन्द से जोड़ो अपना आप
कि कवि की व्यथा हृदय सह जाए
थामकर हँसना-रोना आज
उदासी होनी की कह जाए!

रघुवीर सहाय की कविता 'आत्महत्या के विरुद्ध'

Book by Raghuvir Sahay:

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रघुवीर सहाय
रघुवीर सहाय (९ दिसम्बर १९२९ - ३० दिसम्बर १९९०) हिन्दी के साहित्यकार व पत्रकार थे। दूसरा सप्तक, सीढ़ियों पर धूप में, आत्महत्या के विरुद्ध, हँसो हँसो जल्दी हँसो (कविता संग्रह), रास्ता इधर से है (कहानी संग्रह), दिल्ली मेरा परदेश और लिखने का कारण (निबंध संग्रह) उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं।

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