औरतें

अपर्णा तिवारी की कविता ‘औरतें’ | ‘Auratein’, a peom by Aparna Tiwari

आगंतुकों के मस्तक पर रोली-चन्दन लगाती औरतें,
दीप प्रज्वलन के लिए धूप-दीप सजाती औरतें।
सम्मान समारोहों में फूल-माला और शॉल लाती औरतें,
और पुरुषों से सजे मंचों पर, स्वागत गीत गाती औरतें।

औरतों! तुम देख रही हो,
साज-सज्जा, शोभा का पर्याय बनती ये औरतें,
उदाहरण है, इस बात का,
कि अभी औरतों के हिस्से कितना कुछ बदलने को बाक़ी है।

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