सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा – जन्म

"मुझे सिर्फ इतना याद है कि मैं उस समय दूसरे लड़कों के साथ अपने शिक्षकों को गाली देना सीखा था। और कुछ याद नहीं पड़ता। इससे मैं अंदाज लगाता हूँ कि मेरी स्मरण शक्ति उन पंक्तियों के कच्चे पापड़-जैसी होगी, जिन्हें हम बालक गाया करते थे। वे पंक्तियाँ मुझे यहाँ देनी ही चाहिए : एकडे एक, पापड़ शेक; पापड़ कच्चो, ___ मारो ___ पहली खाली जगह में मास्टर का नाम होता था। उसे मैं अमर नहीं करना चाहता। दूसरी खाली जगह में छोड़ी हुई गाली रहती थी, जिसे भरने की आवश्यकता नहीं।"

सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा – प्रस्तावना

चार या पाँच वर्ष पहले निकट के साथियों के आग्रह से मैंने आत्मकथा लिखना स्वीकार किया और उसे आरंभ भी कर दिया था। किंतु फुल-स्केप...

STAY CONNECTED

26,352FansLike
5,944FollowersFollow
12,564FollowersFollow
232SubscribersSubscribe

MORE READS

कॉपी नहीं, शेयर करें! ;-)