‘Bandish’, a poem by Vishesh Chandra Naman

जिधर जाना नहीं था
उधर से कोई आता दिखता था

जिधर देखना नहीं था
एक आवाज़ तो वहीं से आयी थी

जिधर सुनना नहीं था
एक स्पर्श टटोलता था मुझको

जिसे छूने पर बंदिश थी
चाहना की ख़ुशबू बिखेरी थी उसने

रुकावटों के इन उपाय में
मैंने जाने को देखा
देखने को सुना
सुनने को छुआ
छूने को चाहा

अधिक इस भीड़ में
मैं थोड़ा कम रहा।

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विशेष चंद्र ‘नमन’
विशेष चंद्र नमन दिल्ली विवि, श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से गणित में स्नातक हैं। कॉलेज के दिनों में साहित्यिक रुचि खूब जागी, नया पढ़ने का मौका मिला, कॉलेज लाइब्रेरी ने और कॉलेज के मित्रों ने बखूबी साथ निभाया, और बीते कुछ वर्षों से वह अधिक सक्रीय रहे हैं। अपनी कविताओं के बारे में विशेष कहते हैं कि अब कॉलेज तो खत्म हो रहा है पर कविताएँ बची रह जाएँगी और कविताओं में कुछ कॉलेज भी बचा रह जायेगा। विशेष फिलहाल नई दिल्ली में रहते हैं।

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