भ्रम

‘Bhram’, a poem by Harshita Panchariya

स्मृतियों में
सहेजने के तौर पर
दिए गए सभी चुम्बन
पीड़ा में ऐसे भ्रम बनाए रखते हैं,
मानो आँख खुलते ही
ईश्वर सामने नज़र आ जाएगा।

यूँ बंद आँखों के अँधेरों में
होंठों का धीरे-धीरे
अनवरत हिलना
प्रार्थनाओं को पूर्ण करने की दिशा में
किया गया प्रयास है।

सुखद स्मृतियाँ जीवित रहकर,
ईश्वर के समक्ष की गई प्रार्थनाओं के पूर्ण होने का
भ्रम बनाए रखती हैं।

यह भी पढ़ें: ‘जिस दिन मेरे अंदर का खारा झरना नदी बनेगा, मैं स्वतः तुम्हारी ओर मुड़ जाऊँगी’

Recommended Book: