‘Bina Signal Ka Chauraha’, a poem by Anubhav Bajpai

बिना सिग्नल के चौराहे पर
बादलों के नीचे
चौराहे से कुछ क़दम पीछे

खड़ा मैं
सोचता हूँ बारे में
ट्रैफ़िक हवलदार के

सुनता हूँ
लोगों की गालियाँ
याद करता हूँ
संसद की तालियाँ

भूल जाता हूँ
ट्रैफ़िक हवलदार को
सोचने लगता हूँ
गाँव के कुम्हार को
चाक को
अधबनी मटकी को
मिट्टी सने हाथों में छुटकी को

लौटता हूँ
खडंजे से रोड पर
कोसता हूँ
ग़लत जगह
घुस आयी गाड़ियों को
स्कूटी पर लहराती साड़ियों को

मारता हूँ ताने
नेता को
विधायक को
सरकार को
ठोंक देता हूँ कार को

लेता हूँ यू टर्न
भूल जाता हूँ ट्रैफ़िक हवलदार को!

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अनुभव
स्वतंत्र फ़िल्मकार। इस समय एमसीयू, भोपाल से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे हैं।सम्पर्क सूत्र : [email protected]

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