बू

‘Boo’, a poem by Joshnaa Banerjee Adwanii

मैंने एक जगह रुक के डेरा डाला
मैंने चाँद सितारों को देखा
मैंने जगह बदल दी
मैंने दिशाओं को जाना
मैं अब ख़ानाबदोश हूँ
मैं नख़लिस्तानों के ठिकाने जानती हूँ
मैं अब प्यासी नहीं रहती
मैंने सीखा कि एक चलती हुई चींटी एक ऊँघते हुए
बैल से जीत सकती है
मुझे बन्द दीवारों से बू आती है

मैं सोयी
मैंने सपना देखा कि जीवन एक सुगन्धित घाटी है
मैं जगी
मैंने पाया जीवन काँटों की खेती है
मैंने कर्म किया और पाया कि उन्ही काँटों ने
मेरा गन्दा ख़ून निकाल दिया
मैंने स्वस्थ रहने का रहस्य जाना
मुझे आरामदायक सपनों से बू आती है

मैं दुखी हुई
लोगो ने सांत्वना दी और बाद में हँसे
मैं रोयी
लोगों ने सौ बातें बनाई
मैंने कविता लिखी
लोगों ने तारीफ़ें की
मेरे दुख और आँसू छिप गये
मैं जान गई कि लोगों को दुखों के कलात्मक
ढाँचे आकर्षित करते हैं
मुझे आँसुओं से बू आती है

मैंने बातूनियों के साथ समय बिताया
मैंने शान्त रहना सीखा
मैंने कायरों के साथ यात्रा की
मैंने जाना कि किन चीज़ों से नहीं डरना
मैंने संगीत सुना
मैंने अपने आस-पास के अनन्त को भर लिया
मैं एकाकीपन में अब झूम सकती हूँ
मुझे ख़ुद के ही भ्रम से बू आती है

मैंने अपने बच्चों को सर्कस दिखाया
मुझे जानवर बेहद बेबस लगे
मैंने बच्चों से बातें की
उनकी महत्वकांक्षाओं की लपट ऊँची थी
मैंने उन्हें अजायबगर और पुस्तकालय में छोड़ दिया
अब वे मुझे अचम्भित करते हैं
मैंने जाना कि बच्चों के साथ पहला क़दम ही
आधी यात्रा है
मुझे प्रतिस्पर्धाओं से बू आती है

मुझे दोस्तों ने शराब पिलायी
मैंने नक्सली भावों से खुद को भर लिया
मैंने जलसे देखे
मैंने अपना अनमोल समय व्यर्थ किया
मैं ख़ुद ही मंच पर चढ़ गई
मेरे दोस्त मुझ पर गर्व करते हैं
मैंने जाना कि सम्राट सदैव पुरुष नहीं होते
मुझे ख़ुद की आदतों से बू आती है

मुझे कठिनाईयाँ मिली
मैंने मुँह फेर लिया
मैंने आलस बन आसान डगर चुनी
मुझे सुकून ना मिला
मैंने कठिनाईयों पर शासन किया
मेरी मेहनत अजरता को प्राप्त हुई
मैंने देखा कठिनाई अब भूत बन मेरे
पीछे नहीं भागती
मुझे बैठे हुए लोगों से बू आती है

मैंने प्रेम किया
मैंने दारुण दुख भोगा
मैंने अपने प्रेमी को दूसरी औरतों से अतरंगी
बातें करते देखा
मैं जलती रही रात भर
मैंने प्रेम को विसर्जित कर दिया
प्रेम ईश्वर के कारखाने का एक मुद्रणदोष है
प्रेम कुष्ठ रोग और तपैदिक से भी भयंकर
एक दिमाग़ी बीमारी है
मुझे उस पल से बू आती है
जब मैंने प्रेम किया…

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