तुम मुझे कोई फूल कहते थे,
पर कौनसा?
यह तुमने मुझपर छोड़ दिया कि मैं कौनसा फूल हूँ,
मैंने बुरांश को चुना,
तुमने पूछा क्यों?
मैंने कहा क्यों नहीं,
और तुम हंस बैठे।
एक बुरांश को तुमने मेरी टहनी से तोड़ कर अपने बालों में ठूंसा दिया,
मैं खिल उठी,
फूल के मानिंद

अंकिता वर्मा
अंकिता वर्मा हिमाचल के प्यारे शहर शिमला से हैं। तीन सालों से चंडीगढ़ में रहकर एक टेक्सटाइल फर्म में बतौर मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव काम कर रही थीं, फिलहाल नौकरी छोड़ कर किताबें पढ़ रही हैं, लिख रही हैं और खुद को खोज रही हैं। अंकिता से ankitavrmaa@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है!