आज सुबह
पेड़ की डाल पर
फिर चहकीं चिड़ियाँ
सुना मैंने

पेड़ की
नंगी डालों पर
फुदक रही थीं चिड़ियाँ
देखा मैंने

ख़ाली कनस्तर
ठण्डा चूल्हा
प्रश्नचिह्न बनीं आँखें
मन को छीलने वाली
चुप्पी में गूँजती
अनिवार्य आवश्यकताओं की सूची

बुझा है मन मेरा
पेड़ नहीं है हरा
फिर भी
चहक / फुदक रही हैं
चिड़ियाँ

ख़ुद देख / समझकर
बच्चों को दिखलाता हूँ-
देखो, कैसे फुदक रही है चिड़ियाँ!
देखो, कैसे फुदक रही है चिड़ियाँ!

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साँवर दइया
साँवर दइया का जन्म 10 अक्टूबर 1948, बीकानेर (राजस्थान) में हुआ। राजस्थानी साहित्य में आधुनिक कहानी के आप प्रमुख हस्ताक्षर माने जाते हैं। पेशे से शिक्षक रहे श्री दइया ने शिक्षक जीवन और शिक्षण व्यवसाय से जुड़ी बेहद मार्मिक कहानियां लिखी, जो "एक दुनिया म्हारी" कथा संकलन में संकलित है। इसे केंद्रीय साहित्य अकादेमी का सर्वोच्च साहित्य पुरस्कार भी मिला।

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