तितली और बाबू

बाबू है एक लड़का। छोटा-सा, प्यारा-सा, सुन्दर-सा, होशियार। लेकिन थोड़ा-सा नटखट। बाबू है तीसरी कक्षा में। इस बार दिल लगाकर पढ़ा। मेहनत की। कोशिश...

खिड़की में खड़ी नन्ही लड़की

किताब अंश: 'तोत्तो चान' माँ की चिन्ता का एक कारण था। तोत्तो-चान ने अभी हाल में ही स्कूल जाना शुरू किया था। पर उसे पहली...

लाॅकडाउन के दसवें दिन में

लाॅकडाउन के दसवें दिन में चिंटू लगा नज़ारे गिनने पापा ने दरवाज़ा खोला चिंटू फिर चहक के बोला- 'खिड़की पे चिड़िया थी आयी मैंने उसकी ड्राइंग बनायी देखो पापा कैसी...

सुन्दर लड़की

समुद्र के किनारे एक गाँव था। उसमें एक कलाकार रहता था। वह दिन-भर समुद्र की लहरों से खेलता रहता, जाल डालता और सीपियाँ बटोरता।...

गोरैया

आज गोरैया ने गाना गाया, पोखर में नहायीं जी भर, धूप में बेख़ौफ़ ख़ुद को सुखाया फुदकती फिरी घास पर यूँ ही, सबने मिल चौपाल सजाया, बातों-बातों में किसी से रूठीं, फिर बातों से उन्हें मनाया, आज किसी...

चिड़िया

'Chidiya', by Amandeep Gujral दूर गगन में उड़ती चिड़िया लौट धरा पर मुझ तक आयी, बोली तू भी पँख लगा ले चल सपनों में गोते खा ले । नभ...

भोलू और चंदू

'Bholu Aur Chandu', a story for kids by Nidhi Agarwal मास्टर जी ने कल के क्लास टेस्ट के पेपर्स बाँटे और कहा कि कल के टेस्ट...

वॉकी-टॉकी दादी-पोती

'Walky Talky Dadi Poti', by Bilqis Zafirul Hasan पार्क की पहली धूप से मिलने उँगली से उँगली को थामे सब को हेलो-हेलो करती वॉकी-टॉकी दादी-पोती सहज-सहज चलती हैं दादी आगे-पीछे फिरती...

अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी

'Ab Yeh Chidiya Kahan Rahegi', Bal Kavita by Mahadevi Verma आँधी आयी ज़ोर-शोर से, डालें टूटी हैं झकोर से। उड़ा घोंसला अण्डे फूटे, किससे दुःख की बात कहेगी! अब यह चिड़िया...

कौआ और कोयल

छत के उपर, काँव-काँव कर कौआ शोर मचाता है ढीठ बना वो बैठा रहता कोयल को बहुत सताता है कोयल बोली- कितनी मीठी मेरी बोली सबका मन हर्षाती है तेरी बोली...

अप्रत्याशित व्यवस्था

स्मृति एक साधारण लड़की थी- गोल चेहरा, ऊँचा माथा, काले बाल, छोटी आँखें और निस्तेज चेहरा। सुंदर न होने के कारण उसमें आत्मविश्वास की...

चाँद

तुम नद्दी पर जा कर देखो जब नद्दी में नहाए चाँद कैसी लगाई डुबकी उस ने डर है डूब न जाए चाँद किरनों की इक सीढ़ी ले कर छम-छम...

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Anamika

पतिव्रता

जैसे कि अंग्रेज़ी राज में सूरज नहीं डूबा था, इनके घर में भी लगातार दकदक करती थी एक चिलचिलाहट। स्वामी जहाँ नहीं भी होते थे होते थे उनके वहाँ पँजे, मुहर,...
Ali Sardar Jafri

निवाला

माँ है रेशम के कारख़ाने में बाप मसरूफ़ सूती मिल में है कोख से माँ की जब से निकला है बच्चा खोली के काले दिल में है जब...
Naveen Sagar

बचते-बचते थक गया

दिन-रात लोग मारे जाते हैं दिन-रात बचता हूँ बचते-बचते थक गया हूँ न मार सकता हूँ न किसी लिए भी मर सकता हूँ विकल्‍प नहीं हूँ दौर का कचरा हूँ हत्‍या...
Paash

आधी रात में

आधी रात में मेरी कँपकँपी सात रज़ाइयों में भी न रुकी सतलुज मेरे बिस्तर पर उतर आया सातों रज़ाइयाँ गीली बुख़ार एक सौ छह, एक सौ सात हर साँस पसीना-पसीना युग...
Giving Flower, Love, Joy, Happiness, Flower

सुन्दर बातें

जब हम मिले थे वह समय भी अजीब था शहर में दंगा था कोई कहीं आ-जा नहीं सकता था एक-दूसरे को वर्षों से जानने वाले लोग एक-दूसरे को अब...
Kedarnath Agarwal

प्रश्न

मोड़ोगे मन या सावन के घन मोड़ोगे? मोड़ोगे तन या शासन के फन मोड़ोगे? बोलो साथी! क्या मोड़ोगे? तोड़ोगे तृण या धीरज धारण तोड़ोगे? तोड़ोगे प्रण या भीषण शोषण तोड़ोगे? बोलो साथी! क्या...
Rajesh Joshi

पृथ्वी का चक्कर

यह पृथ्वी सुबह के उजाले पर टिकी है और रात के अंधेरे पर यह चिड़ियों के चहचहाने की नोक पर टिकी है और तारों की झिलमिल लोरी पर तितलियाँ...
Harivansh Rai Bachchan

कवि के मुख से : मधुशाला

ऑल इण्डिया रेडियो, लखनऊ, से प्रसारित, 1941 मेरी सबसे पहली रचना 'तेरा हार' 1932 में प्रकाशित हुई थी। उसकी प्रशंसा मैंने पत्रों में पढ़ी थी...
Dictatorship

सुनो तानाशाह!

सुनो तानाशाह! एक दिन चला जाऊँगा एक नियत दिन जो कई वर्षों से मेरी प्रतीक्षा में बैठा है मेरी जिजीविषा का एक दिन जिसका मुझे इल्म तक नहीं है— क्या...
Bhagat Singh

सत्याग्रह और हड़तालें

'भगत सिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़' से जून, 1928 'किरती' में इन दो विषयों पर टिप्पणियाँ छपीं। भगतसिंह 'किरती' के सम्पादक मण्डल...
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